Monday, October 8, 2012

आदत हो गई है


आदत हो गई है  

उनकी  आदत हो गई  और हमारी इबादत हो गई
हमें उनकी गलतिओं  की आदत हो गई
उन्हें सितम धने की आदत हो गई
हमने शायद में जिंदगी बिता दी
उनहोंने सितम ढाने में महारत हासिल कर ली
अब आ के सोचा तो  क्या पाया
हमने तो यूँ ही जिंदगी गवा दी
अब इस मोड़ पे कहाँ जाएँ
न मुड़ने की हिम्मत न रह बदलने का साहस 

मायका

संदेसा


मायके का संदेसा आया

जिन्दगी में रंग भर लाया 

Sunday, October 7, 2012

नमक

               
लोग हाथों  में नमक लिए फिरते हैं
मत दिखाया करो जखम अपने ............

Sunday, August 26, 2012

आंसू

                               आंसू 

   आंसू सबसे सच्चे सबसे पक्के साथी 
     जब कोई ढाढस बंधानेवाला नहीं होता
                            तो यह कहते हैं हम साथ हैं
                                          ख़ुशी मैं भी साथ और गम मैं भी साथ
  आंसू बेरंग हो के भी कितने रंग दे जाते हैं 
                         चुप चाप बिना कोई भेद खोले   
                                              
      

Thursday, August 16, 2012

पैबंद

 पैबंद
कितने पैबंद लगाये कोई
कहाँ तक सह पाए  कोई
अब तो अनगिनत हो गई गिनती
अब तो थक गए हैं इन पैबन्दो से
मूल रूप तो खो गया शायद कहीं
किसे फुर्सत है यह महसूस करने की
अब तो थक गए पैबन्दों की दुनियां से
अगर यही जीवन है तो नहीं चाहिए
यह पैबन्दों की दुनियां
बस अब और नहीं ..............
बस अब और नहीं ................
मूल रूप चाहिए .....................


Tuesday, July 31, 2012

भोले बच्चे

बच्चे

भोली दुनिया

के

भोले बच्चे

Saturday, July 28, 2012

ये रास्ते

रास्ते 
                                         
                                          
कहाँ से चले थे कहाँ आ पहुंचे
जाना था किधर यहाँ कैसे आ पहुंचे
यह रास्ते कब बदल गए कहीं हमने तो नहीं राह बदल ली
बस यही सोच के गम हूँ में भटक गई की राह उलझ गई